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7.4.19

20.3.19

ओ गौरैया

आज विश्व गौरैया दिवस है । हमारी प्रिय नन्हीं गौरैया की घटती संख्या चिन्ता का विषय है ..वातावरण में परिवर्तन को इसका जिम्मेदार मानती हूँ । चर्प-चर्प करती ये चिड़िया तो हमारी बचपन की साथी हैं ।अपने बालपन के साथी पर आँच कैसे आने दें ! हमारे बचपन के घर के छत , आँगन , मुड़ेर सब पर इनकी भाग दौड़ लगी रहती थी । अब ये इतनी कम नजर आती हैं कि मन व्यथित हो उठता है....

3.2.19

किताबें

 बतिया रही थी
किताबें
हँस हँस के,

स्त्री वो ...

उन्होंने
दरवाजा कसकर  भिड़काया
झिर्री से आसमां दिखाया
स्त्री वो
दृष्टा थी
अभ्र मापने निकल पड़ी

22.1.19

खुशफहमी



न डाकिये की मनुहार
न मिट्टी का उपहार

बचपन

बचपन की उन शैतानियो को प्रणाम उन खेलों को नमन